यूपी में ओला-उबर समेत एप आधारित वाहनों पर सख्ती, नई नियमावली से बढ़ेगी निगरानी

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     लखनऊ

     प्रदेशभर में एप से चलने वाले वाहनों की जल्द ही निगरानी शुरू होगी। ओला, उबर, रैपिडो, बाइक टैक्सी व डिलीवरी वाहनों को भी ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। इससे वाहन चलाने वाले ड्राइवरों का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन व फिटनेस टेस्ट आदि कराया जाएगा।

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    यात्रियों खासकर महिलाओं की सुरक्षा में यह कदम अहम साबित होगा। परिवहन विभाग को मिले सुझाव व आपत्तियों का जवाब परिवहन विभाग ने शासन को भेज दिया है। अब इस माह के अंत या अगले महीने नई नियमावली लागू होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 93 में एक जुलाई 2025 को संशोधन किया था।

    केंद्र सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश ने अपनाया है। पहले ओला-उबर आदि पर कोई नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 10 मार्च को ही कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक व वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली 2026 पर मुहर लगाई थी।

    पांच अप्रैल तक नई नीति के संबंध में सुझाव व आपत्तियां मांगी गई थी। परिवहन विभाग को करीब डेढ़ दर्जन से अधिक आपत्तियां व सुझाव मिले थे। सुझाव मिला था कि एप आधारित वाहनों के लिए जगह-जगह हाल्ट बनाए जाएं, ताकि वहां पर ड्राइवरों के विश्राम करने की व्यवस्था हो।

    ड्राइवरों पर उम्र की शर्त न हो बल्कि वे जब तक फिट रहे वाहन चला सकें। राज्य परिवहन प्राधिकरण के सचिव सगीर अंसारी ने बताया कि परिवहन विभाग ने पॉलिसी से संबंधित ब्योरा शासन को भेज दिया है। शासन ही इस पर अंतिम निर्णय लेकर नई नियमावली लागू करेगा।

    वाहनों का पंजीकरण कराने की ऑनलाइन आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, वहीं 50 से 100 या इससे अधिक वाहन चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। नवीनीकरण हर पांच साल में होता रहेगा, इसकी फीस पांच हजार रुपये होगी। इसके लिए परिवहन विभाग एप भी बनाएगा।

    अब 12 साल पुराने वाहनों का पंजीकरण हो सकेगा, पहले वाहन की आयु आठ वर्ष रखने पर मंथन हुआ था लेकिन, वाहन स्वामियों ने यह कहकर विरोध किया था कि सात वर्ष तक वे बैंक का ऋण ही चुकाते रहते हैं। महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी वाहनों में पैनिक बटन लगे होंगे और वीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस से उन्हें जोड़ा जाएगा। वाहन बुक कराते ही ड्राइवर की पूरी जानकारी मोबाइल पर दिखेगी।

    यात्रियों व ड्राइवरों का होगा बीमा
    ओला-उबर या अन्य वाहनों के ड्राइवरों व यात्रियों का पांच-पांच लाख लाख रुपये का बीमा होगा। ड्राइवर का पांच लाख रुपये का हेल्थ व टर्म बीमा 10 लाख रुपये का होगा। शिकायतों की सुनवाई के लिए 24 घंटे ग्रीवांस सेल सक्रिय रहेगी। हर वाहन की रेटिंग होगी, यह रेटिंग यात्रियों के हाथ में रहेगी। उसी के आधार पर ड्राइवरों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

     

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