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महिलाओं को ₹3000, फ्री बस सफर और 7वां वेतन आयोग… शुभेंदु कैबिनेट के 5 बड़े फैसले

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कलकत्ता

पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के बाद सीएम सुवेंदु अधिकारी एक के बाद एक लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। सोमवार को एक बार फिर से सीएम शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक से राज्य की जनता के लिए कई अहम घोषणाएं सामने आई हैं। इनमें महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना के तहत 3000 रुपये और सरकारी बसों में महिलाओं को फ्री यात्रा जैसी कई घोषणाएं की गई हैं।

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कब से मिलेगी आर्थिक सहायता?
सोमवार को शुभेंदु कैबिनेट कई अहम फैसलों पर मुहर लगा दी है। राज्य सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने जानकारी दी है कि कैबिनेट की बैठक में अन्नपूर्णा योजना को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के तहत राज्य में महिलाओं को 1 जून 2026 से हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने 1 जून से सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा को भी मंजूरी दे दी है।

मदरसा को नहीं मिलेगी कोई आर्थिक सहायता
इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग का भी राज्य सरकार ने गठन किया है। हालांकि, दूसरी कैबिनेट बैठक में बकाया डीए पर कोई फैसला नहीं लिया गया।

इसके अलावा मंत्री अग्निमित्रा पाल ने बताया कि जिन महिलाओं का नाम लक्ष्मी भंडार में है उन्हें नए तरीके से अन्नपूर्णा भंडार योजना के लिए फार्म भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं, मदरसा को मिलने वाले तमाम सरकारी सहायता को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसमें इमाम और मोअज्जिम को मिलने वाला मासिक भत्ता भी शामिल है।

सातवें राज्य वेतन आयोग को भी मंजूरी
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया है कि पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने अपने कर्मचारियों, संबद्ध वैधानिक निकायों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन को भी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही धार्मिक वर्गीकरण के आधार पर समूहों को दी जाने वाली सरकारी सहायता जून से बंद करने का निर्णय लिया गया है। अग्निमित्रा पॉल ने आगे बताया है कि सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले और मतदाता सूची में शामिल होने के लिए गठित न्यायाधिकरणों के सदस्यों को 'अन्नपूर्णा' योजना का लाभ मिलेगा।

हर 15 दिन में होगी कैबिनेट की बैठक
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने जानकारी दी है कि पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ओबीसी कैटेगरी को लेकर हाई कोर्ट के फैसले पर ही आगे से काम करेगी। इसके साथ ही बंगाल में आम जनता के लिए नए इलेक्ट्रिक बस लाए जाएंगे। वहीं, उन्होंने बताया है कि राज्य में हर 15 दिन में कैबिनेट की बैठक का आयोजन किया जाएगा।

7वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में 7वें वेतन आयोग के गठन को भी मंजूरी दी गई. इससे राज्य कर्मचारियों के वेतन और भत्तों को लेकर आगे प्रक्रिया शुरू होगी. इसके अलावा सरकार ने धार्मिक परियोजनाओं से जुड़े कामों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है. प्रेस ब्रीफिंग में बताया गया कि धार्मिक गतिविधियों से जुड़े प्रोजेक्ट इस महीने तक जारी रहेंगे, लेकिन अगले महीने से इन्हें रोक दिया जाएगा। 

आवेदन के लिए खोला जाएगा पोर्टल
लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं को अब खुद ही अन्नपूर्णा भंडार योजना का लाभ मिलेगा. मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा है कि जिन लोगों को अब तक यह लाभ नहीं मिला है, उनके लिए जल्द ही एक पोर्टल खोला जाएगा, जहां आवेदन की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी. यह भी ऐलान किया कि जिन लोगों ने CAA के लिए आवेदन किया है और जिनके मामले ट्रिब्यूनल में लंबित हैं, उन्हें भी अन्नपूर्णा भंडार योजना का लाभ दिया जाएगा। 

धर्म आधारित सहायता योजनाएं होंगी बंद
इसके साथ ही सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि मदरसा विभाग और सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग के तहत चल रही धर्म आधारित सहायता योजनाओं को बंद किया जाएगा. सरकार के मुताबिक, ऐसी योजनाएं अगले महीने से रोक दी जाएंगी। 

इससे पहले हुए कैबिनेट बैठक में भी नई सरकार ने अहम फैसले लिए थे. उस बैठक में सबसे पहला फैसला आयुष्मान भारत को लागू करने का लिया गया था. वहीं पश्चिम बंगाल में भारतीय न्याय संहिता भी लागू की गई थी। 

पहले कैबिनेट बैठक के अहम फैसले

1. आयुष्मान भारत योजना को लागू किया जाएगा. राज्य और केंद्र सरकार मिलकर राज्य में इसे लागू करने के लिए काम करेंगे। 
2. नियमों के मुताबिक, आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रशिक्षण में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी। 

3. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार (ममता सरकार) ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था। 

4. बॉर्डर एरियाज में जमीन ट्रांसफर का काम आज से शुरू होगा. 45 दिनों के अंदर जमीन BSF को ट्रांसफर की जाएगी। 

5. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बता दें कि बीजेपी का ऐसा दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।  

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