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US का बड़ा AI प्रतिबंध! सबसे ताकतवर मॉडल पर लगा बैन, भारत समेत कई देशों पर क्या होगा असर?

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 नई दिल्ली/वाशिंगटन

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने तकनीकी विशेषज्ञों और दुनियाभर की सरकारों को चौंका दिया है। अमेरिका ने एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए मशहूर एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक (Anthropic) को निर्देश दिया है कि वह अपने सबसे पावरफुल एआई मॉडल्स- क्लॉड फैबल 5 (Claude Fable 5) और मिथोस 5 (Mythos 5) का एक्सेस भारतीयों सहित सभी गैर-अमेरिकी नागरिकों के लिए तुरंत रोक दे। इस सरकारी आदेश के बाद कंपनी को मजबूरन ग्लोबल लेवल पर इन मॉडल्स को बंद करना पड़ा है।

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अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है और गैर अमेरिकियों के लिए पावरफुल AI मॉडल के एक्सेस को बैन कर दिया है. यह नियम एंथ्रोपिक के सबसे एडवांस्ड एआई मॉडल्स Claude Fable 5 और Mythos 5 पर लागू होगा. अमेरिका ने एंथ्रोपिक के लिए एक्सपोर्ट कंट्रोल के निर्देश दिए हैं, जो इन मॉडल्स पर लागू होंगे। 

दरअसल, अमेरिकी सरकार के एक विभाग ने पावरफुल एआई मॉडल्स Claude Fable 5 और Mythos 5 के ग्लोबल एक्सेस पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है, जिसकी जानकारी शनिवार को मिली. यह बैन अमेरिका के बाहर के सभी यूजर्स, जिसमें एंथ्रोपिक के विदेशी कर्मचारी भी शामिल हैं। 

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के मुताबिक, इन मॉडल्स में कुछ ऐसी खामियां हैं, जिनका इस्तेमाल करके हैकर्स सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों का पता लगा सकते हैं और बड़े साइबर हमलों से बच सकते हैं. हैकर्स के हाथ में यह तकनीक पहुंचती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है। 

अमेरिका ने क्यों लगाया प्रतिबंध?
AI जगत में इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पहली बार किसी सरकार ने सीधे AI सॉफ्टवेयर की पहुंच पर रोक लगाई है। यह कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है, बल्कि एक संकेत है कि दुनिया में एआई को लेकर नियम कितनी तेजी से बदल रहे हैं। आइए इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं:

    12 जून को अमेरिकी प्रशासन ने एंथ्रोपिक को स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी विदेशी नागरिक (चाहे वह अमेरिका के अंदर हो या बाहर) इन नए मॉडल्स का उपयोग नहीं कर सकेगा। यह आदेश इतना व्यापक था कि इसमें कंपनी के अपने गैर-अमेरिकी कर्मचारी भी शामिल थे। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए एंथ्रोपिक के पास इन दोनों मॉडल्स को पूरी तरह से बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। हालांकि, यूजर्स कंपनी के अन्य पुराने मॉडल्स का इस्तेमाल पहले की तरह कर सकेंगे।

    वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेजन के कुछ शोधकर्ताओं ने टेस्टिंग के दौरान फैबल 5 (Fable 5) मॉडल में कुछ सॉफ्टवेयर कमजोरियों का पता लगाया था। यह जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग के साथ साझा की गई। अमेरिकी अधिकारियों को यह डर सताने लगा कि इस सिस्टम के सुरक्षा घेरे को आसानी से तोड़ा जा सकता है। सरकार का मानना है कि अगर इतनी शक्तिशाली तकनीक गलत हाथों में पड़ गई, तो इसका इस्तेमाल सरकारी नेटवर्क्स, बैंकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर खतरनाक साइबर हमले करने के लिए किया जा सकता है।

    कंपनी ने सरकार के इस फैसले को असंगत बताया है। एंथ्रोपिक का तर्क है कि जिन कमजोरियों का जिक्र किया जा रहा है, वे पहले से ही सार्वजनिक रूप से ज्ञात हैं और बाजार में मौजूद अन्य एआई मॉडल्स भी उन्हें आसानी से ढूंढ सकते हैं। कंपनी का दावा है कि उसने लॉन्च से पहले अमेरिकी और ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर इन मॉडल्स की हफ्तों तक कड़ी टेस्टिंग की थी। एंथ्रोपिक इसे एक 'गलतफहमी' मान रही है और अधिकारियों के साथ मिलकर इस प्रतिबंध को जल्द से जल्द हटाने की कोशिशों में जुटी है।

    यह बैन रातों-रात नहीं लगा है। पिछले कुछ समय से अमेरिकी प्रशासन और एंथ्रोपिक के बीच मतभेद चल रहे हैं। कंपनी ने पहले अपने एआई का इस्तेमाल घरेलू निगरानी और स्वचालित हथियारों के लिए करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद पेंटागन ने एंथ्रोपिक को "सप्लाई-चेन रिस्क" तक घोषित कर दिया था। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब कंपनी जल्द ही अपना आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी कर रही है, जिससे इसकी वैल्यूएशन लगभग एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

विदेशी यूजर्स के लिए सेवा पूरी तरह बंद
रिपोर्ट के अनुसार, एंथ्रोपिक के पास ऐसा कोई विश्वसनीय तंत्र नहीं है जिससे हर उपयोगकर्ता की राष्ट्रीयता की सटीक पहचान की जा सके। इसी कारण कंपनी को अमेरिका के बाहर के सभी उपयोगकर्ताओं के लिए इन मॉडलों की पहुंच बंद करनी पड़ी है।

इस फैसले को सोशल मीडिया पर टेक उद्योग का ‘9/11’ तक कहा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक एआई इतिहास में यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी कंपनी के अत्याधुनिक और खुले बाजार में उपलब्ध मॉडल को अचानक वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित किया गया है।

साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘फेबल-5’ और ‘मायथोस-5’ जैसे उन्नत मॉडल साइबर सुरक्षा की कमजोरियों का विश्लेषण करने, मालवेयर जांचने, सैन्य रणनीति और जैविक अनुसंधान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उपयोग किए जा सकते हैं।

यदि कोई एआई मॉडल सॉफ्टवेयर की कमियां खोजने और सिस्टम को तोड़ने के तरीके सुझाने में सक्षम हो जाए, तो वह साइबर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी सरकार ने इस पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू किया है।

भारत के लिए दो बड़े सबक
कोरोवर. एआई के फाउंडर और सीईओ अंकुश सभरवाल ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस फैसले से सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान खुद एंथ्रोपिक और अमेरिका को होगा। उनका कहना है कि जब किसी कंपनी का सबसे उन्नत सॉफ्टवेयर वैश्विक बाजार में उपलब्ध नहीं रहेगा, तो उसके व्यापार और निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी टेक उद्योग में बड़ी संख्या में भारतीय, चीनी और अन्य एशियाई मूल के डेवलपर्स काम करते हैं। ऐसे में पूरी तरह प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक चुनौती भी है। अंकुश सभरवाल के अनुसार, भारत के लिए इससे दो महत्वपूर्ण सबक निकलते हैं। पहला, भारतीय स्टार्टअप्स को केवल विदेशी एआई एपीआई पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यदि भविष्य में जियो-ब्लॉकिंग या एक्सपोर्ट बैन लागू होते हैं, तो भारतीय कंपनियों का काम प्रभावित हो सकता है।

दूसरा, भारत को केवल विदेशी एआई तकनीक का उपभोक्ता बनने के बजाय अपना स्वदेशी एआई इकोसिस्टम तैयार करना होगा। इसके लिए ‘इंडिया एआई मिशन’, घरेलू एलएलएम और स्वदेशी कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम करने की जरूरत बताई गई है।

जोहो फाउंडर ने दी चेतावनी
अब तक अमेरिका सिर्फ एआई चिप्स और हार्डवेयर (जैसे सेमीकंडक्टर) के निर्यात को रोकता था, लेकिन यह पहली बार है जब सीधे 'एआई सॉफ्टवेयर' पर रोक लगाई गई है। जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इसे भारत के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी बताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "वैश्वीकरण अब खत्म हो चुका है।" वेम्बू का मानना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को विदेशी कंपनियों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। अब वक्त आ गया है कि देश अपनी खुद की सॉवरेन एआई (Sovereign AI) क्षमताएं विकसित करे और घरेलू रिसर्च व ओपन-सोर्स मॉडल्स पर भारी निवेश करे।

आगे क्या होगा?
फिलहाल, एंथ्रोपिक सरकारी आदेश का पालन कर रही है। लेकिन इस घटना ने दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि भविष्य में एआई को सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर की तरह एक 'रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा माना जाएगा। ऐसे में, जो देश अपनी खुद की एआई तकनीक विकसित नहीं करेंगे, वे भविष्य की डिजिटल दौड़ में बहुत पीछे छूट सकते हैं। 

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