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आत्म-ज्ञान पर शंकराचार्य की सीख, नाम-धन से ऊपर है वास्तविक आत्म-शांति का मार्ग

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इसका सीधा सा मतलब यह है कि हम जिंदगी भर बाहरी चीजों को पाने में लगे रहते हैं, लेकिन अपने असली रूप को पहचानना भूल जाते हैं.

स्वयं को जानने का मतलब क्या है?
अक्सर हम खुद को अपने नाम, अपने काम (नौकरी), या अपनी सुख-सुविधाओं से जोड़कर देखते हैं. शंकराचार्य कहते हैं कि ये सब तो बस बाहरी पहचान हैं. स्वयं वह शक्ति है जो हमारे भीतर है, जो हमारी भावनाओं और विचारों को महसूस करती है. जब हम यह समझ जाते हैं कि हम सिर्फ एक शरीर नहीं हैं, बल्कि उससे कहीं बढ़कर हैं, तो जीवन जीने का तरीका बदल जाता है.

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हम दुखी क्यों रहते हैं?
हम अक्सर उन चीजों के पीछे भागते हैं जो आज हैं और कल नहीं रहेंगी.  जब हम बाहर की चीजों (जैसे पैसा, नाम या पद) में खुशी ढूंढते हैं, तो वह खुशी हमेशा के लिए नहीं रहती. इसीलिए हमें हमेशा डर और चिंता बनी रहती है. आचार्य कहते हैं कि जब तक हम खुद को नहीं पहचानेंगे, तब तक हमें बाहर की किसी भी चीज से सच्ची और स्थायी शांति नहीं मिल पाएगी. इसीलिए उन्होंने कहा कि खुद को जाने बिना बाकी सब कुछ व्यर्थ है.

इसका फायदा क्या है?
खुद को जानने का मतलब है अपने मन को समझना. जब आप खुद को पहचानने लगते हैं, तो छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना, दूसरों से तुलना करना या भविष्य का डर सताना कम हो जाता है. आप शांत और स्थिर हो जाते हैं. आप समझ जाते हैं कि जो असली खुशी है, वो कहीं बाहर नहीं, बल्कि आपके अपने अंदर ही है.

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