मायावती का बड़ा बयान: मुसलमान अब सपा-कांग्रेस नहीं, बसपा को वोट दें ताकि बीजेपी को हराया जा सके

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    लखनऊ
    बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को कहा कि मुस्लिम समाज को एकजुटता के साथ समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बजाय सीधे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का समर्थन करना चाहिये ताकि भाजपा की घातक राजनीति को चुनाव में हराया जा सके। उन्होंने कहा कि सपा के समर्थन में मुस्लिम समाज के एकतरफा वोट देने के बावजूद वह (सपा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने में विफल रही।

    बसपा नेता मायावती ने पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिये बुधवार को यहां ‘बसपा मुस्लिम समाज भाईचारा संगठन’ की विशेष बैठक की अध्यक्षता की तथा मुस्लिम समाज को बसपा में जोड़ने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिये। मायावती ने कहा,‘‘वर्ष 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव तथा उससे पहले के चुनाव से यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि उप्र में मुस्लिम समाज का पूरे तन, मन, धन से जबरदस्त समर्थन मिलने के बावजूद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी भाजपा को हराने में विफल रहीं। इसके विपरीत बसपा ने मुस्लिम समाज का काफी कम समर्थन पाकर भी भाजपा को परास्त करने में सफल रही और वर्ष 2007 में बसपा की बहुमत के साथ सरकार बनी।’’

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    पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस, दोनों ने ऐतिहासिक रूप से ‘दलित-विरोधी, पिछड़ा-विरोधी और मुस्लिम-विरोधी’ राजनीति की है। उन्होंने कहा कि उनकी ‘गलत नीतियों और गतिविधियों’ के कारण ही उत्तर प्रदेश में भाजपा मजबूत हुई है। मायावती ने कहा, ‘‘न केवल 2022 के विधानसभा चुनाव में, बल्कि लगभग हर चुनाव में, इन पार्टियों – सपा और कांग्रेस – ने भाजपा को हराने के लिए नहीं, बल्कि बसपा को नुकसान पहुंचाने के लिए छल-कपट समेत हर संभव हथकंडा अपनाया। एकतरफा मुस्लिम वोट पाने के बावजूद, वे भाजपा को रोकने में नाकाम रहे। मुस्लिम समुदाय को इस सच्चाई को जल्द से जल्द समझ लेना चाहिए।’’

    मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मायावती ने कहा, ‘‘एक पार्टी और एक सरकार के रूप में, बसपा ने मुसलमानों को हर स्तर पर सुरक्षा, संरक्षा और उचित प्रतिनिधित्व की गारंटी देकर उनका वास्तविक कल्याण सुनिश्चित किया। हमने उनके जीवन, संपत्ति और आस्था की रक्षा के लिए उत्कृष्ट कानून-व्यवस्था प्रदान की और जातिवाद और सांप्रदायिकता पर काफी हद तक अंकुश लगाने का काम किया।’’ उन्होंने आगे कहा कि बसपा सरकार ऐसी पहली सरकार थी जिसने अन्याय, अराजकता और आपराधिक तत्वों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए काम किया। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘हमने उत्तर प्रदेश को दंगों, शोषण, अन्याय और भय से मुक्त बनाया, जबकि अन्य दलों के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित हुए क्योंकि उनकी कथनी और करनी में बहुत फर्क है।’’

    मायावती ने कहा, ‘‘दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के लाखों लोग बसपा के ‘बहुजन समाज’ के अभिन्न अंग हैं। पार्टी का मिशन राजनीतिक सशक्तिकरण के माध्यम से इन वंचित और उपेक्षित समुदायों का उत्थान करना है, ताकि वे संविधान के मानवीय और कल्याणकारी सिद्धांतों के अनुसार सम्मान और आत्मसम्मान का जीवन जी सकें, जो भारत को वास्तव में महान बनाने के लिए आवश्यक है।’’

    बैठक में मुस्लिम समाज भाईचारा संगठन के पदाधिकारियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष एवं सभी जिलाध्यक्ष व मंडल प्रभारी भी उपस्थित थे, जिन्हें निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से सम्बन्धित दिशा-निर्देशों के संबंध में भी अवगत कराया गया।

    बसपा अध्यक्ष ने पार्टी नेताओं को बूथ स्तर पर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर ना रहे। उन्होंने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया कि वे उन लोगों की मदद करें जिनके नाम सूची में नहीं हैं और उनके निर्धारित प्रपत्र भरकर आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें ताकि उनका नाम सूची में शामिल हो सके। मायावती ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मुसलमानों के कल्याण के लिए अपनी सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों का भी विवरण दिया।

     

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