सहारनपुर में नकली सिक्कों की फैक्ट्री का बड़ा खुलासा, 6 मशीनें और 59 डाई बरामद; अब सप्लायरों की तलाश

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    लखनऊ
    यूपी के सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री से बरामद छह मशीनों और 59 डाई ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटेगी कि 70 करोड़ के नकली सिक्के बनाने में इस्तेमाल मशीन, डाई और अन्य सामान कहां से खरीदा गया। सप्लायरों की कड़ी खुलने पर नकली सिक्कों के नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

    पुलिस ने फैक्ट्री से छह मशीनों के साथ 59 डाई बरामद की थी। इनमें 39 डाई बिना निशान वाली और 20 पर निशान लगे थे। इसके अलावा डाई की पॉलिश करने की मशीन, ग्राइंडिंग स्टोन, हथौड़ा, फाइल, रिंच, आरी, इलेक्ट्रॉनिक कांटा और ओवन समेत अन्य सामान भी मिला था। अब जांच में इन सभी सामान के स्रोत को खंगालने की तैयारी है।

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    पुलिस के मुताबिक फैक्ट्री में तैयार नकली 20 रुपये के 6,400 सिक्के बरामद हुए थे, जिनकी कीमत 1.28 लाख रुपये थी। करीब पांच लाख कीमत के अधबने सिक्के भी मिले थे। आरोपियों के मुताबिक एक सिक्का तैयार करने में पांच से छह रुपये खर्च होते थे और उसे एजेंटों को 12 से 15 रुपये में बेचा जाता था। शराब ठेकों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों तक इनकी खेप पहुंचने की बात सामने आई थी।

    मशीन से डाई तक बड़ा सेटअप
    फैक्ट्री में नकली सिक्के तैयार करने के लिए छह मशीनें और 59 डाई लगी थीं। इनमें 39 डाई बिना निशान वाली और 20 पर निशान लगे थे। इसके अलावा डाई पॉलिश करने की मशीन, ग्राइंडिंग स्टोन, हथौड़ा, फाइल, रिंच, आरी, इलेक्ट्रॉनिक कांटा और ओवन भी मिला था। इतनी बड़ी मात्रा में मिले सामान के स्रोत की पड़ताल अब जांच का अहम हिस्सा होगी।

    पांच आरोपी जेल भेजे जा चुके
    नकली सिक्के बनाने के मामले में पुलिस ने उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह, हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन और अनुराग पाल उर्फ लंकेश को गिरफ्तार किया था। पांचों को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस के सामने अब फैक्ट्री तक मशीन और डाई समेत अन्य सामान पहुंचाने वालों की पहचान करने की चुनौती है। सप्लायरों की जानकारी मिलने पर जांच आगे बढ़ेगी।

    मशीन और सामानों की कहीं और भी हुई है सप्लाई
    अब यह भी आशंका जताई जा रही है कि जिस तरह से मशीन यहां भेजी गई, उसी तरह कहीं और भी तो मशीन देकर सिक्कों का निर्माण नहीं हो रहा है। सप्लायर तक पहुंचने के बाद कई और नकली सिक्कों की फैक्ट्री का खुलासा हो सकता है।

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