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देवास में टाटा इंटरनेशनल पर कोर्ट का फैसला: 80 महिला कर्मचारियों को वापस काम पर रखने का आदेश

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देवास

देवास स्थित टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड कंपनी द्वारा वर्ष 2017 में बिना नोटिस और जानकारी के नौकरी से निकाली गई महिला कर्मचारियों के मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने बिना नोटिस फैक्ट्री बंद करने और कर्मचारियों को निकालने को कानून का उल्लंघन मानते हुए कंपनी को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित 80 नियमित महिला कर्मचारियों को दोबारा काम पर रखा जाए और उन्हें आधे वेतन के साथ बहाल किया जाए।

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मामले में इंटेक यूनियन और कंपनी प्रबंधन के बीच बातचीत हुई है, लेकिन बहाली की प्रक्रिया मुंबई हेड ऑफिस से अनुमति मिलने के बाद ही शुरू होगी।

2017 में 700 महिलाओं को अचानक निकाला था
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में लेडीज फुटवियर निर्माण कार्य में लगी लगभग 700 महिला कर्मचारियों को कंपनी ने अचानक नौकरी से निकाल दिया था। इनमें से लगभग 80 महिलाएं कंपनी की नियमित कर्मचारी थीं, जबकि कुछ ठेका प्रणाली के तहत कार्यरत थीं। अदालत ने बिना नोटिस निकाले जाने और फैक्ट्री बंद करने के इस मामले को कानून का उल्लंघन माना है।

वकील बोले- कंपनी द्वारा किया गया बंदीकरण दंडनीय अपराध
मामले में वकील बीएल नागर ने जानकारी दी कि, "कंपनी द्वारा किया गया बंदीकरण दंडनीय अपराध है और अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। फिलहाल 80 कर्मचारियों को बहाल करने का आदेश हुआ है और अन्य मामलों में भी कानूनी प्रक्रिया जारी है।"

इस फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस नेत्री रेखा वर्मा ने इसे महिलाओं के संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि, "बिना नोटिस कर्मचारियों को निकालना पूरी तरह गैरकानूनी था और कंपनी को जल्द से जल्द न्यायालय के आदेश का पालन करना चाहिए।"

मुंबई हेड ऑफिस की अनुमति का इंतजार
इंटेक के जिलाध्यक्ष महेश राजपूत ने बताया कि कंपनी प्रबंधन से इस संबंध में बातचीत की गई है। उन्होंने बताया कि आदेश को अभी तक आधिकारिक रूप से लागू नहीं किया गया है। उनका कहना है कि कंपनी हेड ऑफिस मुंबई से अनुमति मिलने के बाद ही कर्मचारियों की बहाली की प्रक्रिया शुरू करेगी।

महिला कर्मचारियों ने न्याय मिलने पर जताई खुशी
न्यायालय का फैसला आने के बाद प्रभावित महिला क
र्मचारी माया ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि लंबे समय से वे परेशान थीं और अब उन्हें राहत मिली है। वहीं, एक अन्य कर्मचारी बीना वैष्णव ने बताया कि पिछले 7-8 वर्षों से उनका संघर्ष जारी था और कर्मचारी संघ के सहयोग से यह जीत संभव हो पाई है।

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