Home अध्यात्म सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को, जानें पूजा के शुभ मुहूर्त

सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को, जानें पूजा के शुभ मुहूर्त

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3 अगस्त 2026 के दिन सावन का पहला सोमवार पड़ रहा है। सावन सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण और खास माना जाता है। इस दिन कई शिव भक्त व्रत रख भोलेनाथ की आराधना करते हैं। कई लोग इस दिन अभिषेक और रुद्राभिषेक भी करते हैं। शुभ मुहूर्त का ध्यान रख कर पूजा-पाठ आरंभ करना चाहिए। गौर फरमाने वाली बात यह रहेगी कि सावन के पहले सोमवार पर सुबह के समय राहुकाल लग रहा है। शुभ मुहूर्त में शिव पूजा और जलाभिषेक करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए जानते हैं सावन सोमवार पर पूजा कब और कब नहीं करना चाहिए-
सावन के पहले सोमवार पर पूजा कब करें, जानें सुबह-शाम के मुहूर्त और शिव पूजा कब न करें

सावन के पहले सोमवार पर पूजा के शुभ मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त- 04:07 बजे से 04:49 बजे तक (सुबह)
    प्रातः सन्ध्या- 04:28 बजे से 05:32 बजे तक (सुबह)
    अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:39 बजे
    विजय मुहूर्त- 02:26 बजे से 03:19 बजे तक (दोपहर)
    गोधूलि मुहूर्त- 06:53 बजे से 07:14 बजे तक (शाम)
    सायाह्न सन्ध्या- 06:53 बजे से 07:57 बजे तक (शाम)
    अमृत काल- 05:07 बजे से 06:45 बजे तक (शाम)
    निशिता मुहूर्त- 11:51 बजे से 12:34 बजे, अगस्त 04 (रात)

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चौघड़िया शुभ मुहूर्त
    अमृत – सर्वोत्तम 05:32 बजे से 07:12 बजे तक (सुबह)
    शुभ – उत्तम 08:52 बजे से 10:32 बजे तक (सुबह)
    चर – सामान्य 01:53 बजे से 03:33 बजे तक (दोपहर)
    चर – सामान्य 06:53 बजे से 08:13 बजे तक (शाम)

सावन के पहले सोमवार पर पूजा कब करने से बचें?
    राहुकाल- 07:12 से 08:52 बजे तक (सुबह)
    यमगण्ड- सुबह 10:32 बजे से दोपहर 12:12 बजे
    गुलिक काल- 01:53 बजे से 03:33 बजे तक (दोपहर)
    विडाल योग- 05:32 बजे से 10:29 बजे तक (सुबह), दोपहर 10:00 बजे से सुबह 05:32 बजे, अगस्त 04
    वर्ज्य- 07:22 बजे से 08:59 बजे तक (सुबह)
    गण्ड मूल- रात 10:00 बजे से सुबह 05:32 बजे, अगस्त 04
    दुर्मुहूर्त- 12:39 बजे से 01:32 बजे तक (दोपहर), दोपहर 03:19 बजे से 04:13 बजे तक (शाम)
    बाण रोग- शाम 06:51 बजे से पूर्ण रात्रि तक
    पञ्चक- पूरे दिन

सावन के पहले सोमवार पर रुद्राभिषेक कब करें?
ज्योतिष शास्त्र और पंचांग के अनुसार, रुद्राभिषेक करने से पहले शिववास का समय देखा जाता है। शिववास के समय जब शिव जी नंदी पर विराजमान होते हैं तब रुद्राभिषेक करना शुभ माना जाता है। इस मुहूर्त में रुद्राभिषेक करने से सफलता मिलती है।

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