फ्लैट रद्द होने पर मिलेगा GST समेत पूरा पैसा वापस, यूपी रेरा का आदेश

    5
    0
    Jeevan Ayurveda

    लखनऊ
     यदि किसी आवंटी ने फ्लैट या फिर भवन निर्माण के लिए भूखंड खरीदने में जीएसटी का भुगतान किया है और बाद में परियोजना निरस्त हो जाए, अनुबंध खत्म या आवंटन रद हो जाए तो ऐसी परियोजना के प्रमोटर जीएसटी सहित फ्लैट या भूखंड की धनराशि आवंटी को वापस करेंगे।

    यदि धनराशि जीएसटी विभाग में स्थानांतरित हो चुकी है तो आवंटी जीएसटी रिफंड का दावा कर सकेगा। यूपी रेरा ने आदेश दिया है कि प्रदेश के सभी रियल एस्टेट प्रमोटर्स को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित जीएसटी दरों का कड़ाई से पालन करना होगा।

    Ad

    असल में, परियोजनाओं के प्रमोटर अनुबंध खत्म या आवंटन निरस्त होने पर फ्लैट या भूखंड की धनराशि ही लौटाते आ रहे हैं। उसी भूखंड या फ्लैट को दोबारा बेचने पर फिर जीएसटी वसूल करते रहे हैं।

    यूपी रेरा के संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं, जिनमें परियोजनाओं के आवंटियों से निर्धारित दर से अधिक जीएसटी की राशि वसूली गई है। यह हालात तब है जब आठ जनवरी 2025 को इस संबंध में आदेश जारी हुआ था। इसके बावजूद मनमानी की जा रही।

    ऐसे में उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए फिर आवंटियों से अधिक वसूली गई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की राशि की वापसी (रिफंड) की प्रक्रिया स्पष्ट किया है।

    ऐसे होगी धनराशि की वापसी
    इसके लिए अपंजीकृत (अनरजिस्टर्ड) आवंटी को सबसे पहले अपने पैन के आधार पर जीएसटी पोर्टल पर अस्थायी पंजीकरण करना होगा। इसके बाद रिफंड फार अनरजिस्टर्ड परसन श्रेणी के अंतर्गत फार्म जीएसटी रिफंड 01 में आवेदन करना होगा।

    आवेदन के साथ भुगतान का प्रमाण, आवश्यक दस्तावेज साथ प्रमोटर द्वारा जारी आवश्यक प्रमाण-पत्र संलग्न करने होंगे। आवेदन और अभिलेखों के सत्यापन के बाद, लागू जीएसटी प्रविधानों के अनुसार सक्षम अधिकारी पात्रता के आधार पर रिफंड स्वीकृत करेगा।

    समय-सीमा व पात्रता की शर्तों का पालन जरूरी
    जीएसटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि अनुबंध निरस्त या फिर समाप्त होने के समय तक प्रमोटर के लिए क्रेडिट नोट जारी करने की वैधानिक अवधि उपलब्ध है तो प्रमोटर स्वयं क्रेडिट नोट जारी करेगा या फिर जीएसटी सहित पूरी धनराशि आवंटी को वापस करेगा।

    केवल उन्हीं मामलों में आवंटी को स्वयं जीएसटी रिफंड के लिए आवेदन करना होगा, जहां क्रेडिट नोट जारी करने की वैधानिक समय-सीमा समाप्त हो चुकी हो। ऐसे मामलों में अनुबंध निरस्तीकरण या समाप्ति की तारीख से दो वर्ष के भीतर रिफंड का दावा किया जा सकता है।

    हालांकि, 1000 रुपये से कम जीएसटी राशि के मामलों में रिफंड का दावा स्वीकार नहीं होगा। प्राधिकरण द्वारा रियल एस्टेट प्रमोटर्स एवं रियल एस्टेट एजेंट्स के लिए जारी निर्देश साथ ही राज्य कर विभाग का जारी पत्र यूपी रेरा की वेबसाइट www.up-rera.in के सर्कुलर अनुभाग में उपलब्ध है।

    Jeevan Ayurveda Clinic

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here