Home देश ये आपका बेटा है?—PIL पर पहुँचे BJP नेता के बेटे पर CJI...

ये आपका बेटा है?—PIL पर पहुँचे BJP नेता के बेटे पर CJI की तीखी चुटकी

39
0
Jeevan Ayurveda

नई दिल्ली
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ आज (सोमवार, 12 जनवरी को) एक ऐसी जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर ही थी, जिसे एक लॉ स्टूडेन्ट ने फाइल की थी और उस मामले की पैरवी उसके ही वकील पिता कर रहे थे। इस याचिका में केंद्र सरकार को ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ (आपत्तिजनक विज्ञापन) एक्ट, 1954 के प्रावधानों की समीक्षा और अपडेट करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि यह कानून अब मौजूदा वैज्ञानिक ज्ञान या मेडिकल प्रैक्टिस को नहीं दिखाता है। इसके अलावा आयुष डॉक्टरों को एलोपैथिक डॉक्टरों के बराबर कानून के तहत 'रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर' घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
 
शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय कानून, स्वास्थ्य और आयुष मंत्रालयों से इस जनहित याचिका पर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान, बेंच ने औपचारिक रूप से नोटिस जारी करने से पहले याचिकाकर्ता के कम उम्र में PIL दायर करने और उसकी पैरवी उसके ही पिता द्वारा करने पर चुटकी ली और हल्के-फुल्के कमेंट्स किए।

दरअसल, ये याचिका नितिन उपाध्याय नाम के लॉ स्टूडेंट ने दायर की है, जो भाजपा नेता और वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय के बेटे हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने पैरवी कर रहे वकील अश्विनी उपाध्याय से पूछा, "क्या यह आपका बेटा है?' इस पर अश्विनी उपाध्याय ने कहा, "जी हाँ।" तभी CJI ने चुटकी ली और कहा, "हमने सोचा था कि उसे कुछ गोल्ड मेडल वगैरह मिलेंगे, लेकिन अब तो ये PIL फाइल करने लगा है।" उन्होंने नितिन से भी पूछा, "अब तुम पढ़ाई क्यों नहीं करते?" इसी बीच, पीठ के दूसरे जज जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, "नोटिस जारी कर रहे हैं। सिर्फ़ आपके बेटे के लिए। ताकि वह अच्छे से पढ़ाई कर सके।"

Ad

बता दें कि इस जनहित याचिका में 1954 के एक्ट के शेड्यूल की समीक्षा और उसे आज के वैज्ञानिक विकास के अनुसार अपडेट करने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी के गठन की भी मांग की गई है। इसमें तर्क दिया गया है कि हालांकि यह एक्ट जनता को गुमराह करने वाले विज्ञापनों से बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन धारा 3(d) कुछ बीमारियों से संबंधित विज्ञापनों पर पूरी तरह से बैन लगाती है, बिना गुमराह करने वाले दावों और सच्ची, सबूत-आधारित जानकारी के बीच अंतर किए।

याचिका में कहा गया है कि चूंकि आयुष और अन्य गैर-एलोपैथिक प्रैक्टिशनर एक्ट की धारा 14 में दिए गए छूट के तहत नहीं आते हैं, इसलिए उन्हें गंभीर बीमारियों के लिए वैध दवाओं का विज्ञापन करने से प्रभावी रूप से रोक दिया गया है, जिससे जनता में अज्ञानता फैल रही है। याचिका में दावा किया गया है कि पुराना कानून बीमारियों के निदान, रोकथाम और उपचार से संबंधित जानकारी के अधिकार को असमान रूप से प्रतिबंधित करता है। इसलिए, आधुनिक चिकित्सा ज्ञान के आलोक में एक्ट की व्यापक समीक्षा की मांग की गई है।

 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here