Home मध्य प्रदेश भोपाल के केरवा-कलियासोत में 96 अवैध निर्माणों पर चलेगी जेसीबी, सरकार ने...

भोपाल के केरवा-कलियासोत में 96 अवैध निर्माणों पर चलेगी जेसीबी, सरकार ने माना स्कूल और रेस्टोरेंट का निर्माण

14
0
Jeevan Ayurveda

भोपाल
 शहर की खूबसूरती और पर्यावरण की जान माने जाने वाले केरवा और कलियासोत जलाशय अब अपने पुराने स्वरूप में लौटेंगे। राज्य सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने स्वीकार किया है कि इन जलाशयों के आसपास के ग्रीन बेल्ट में बड़े पैमाने पर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। भोपाल विकास योजना 2005 के प्रावधानों को ताक पर रखकर यहां जो निर्माण हुए थे, अब उन्हें हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। 13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद अब जमीन का सीमांकन शुरू हो गया है।

क्या-क्या बना है 'नो-कंस्ट्रक्शन जोन' में?
सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, कुल 96 निर्माणों को अवैध पाया गया है। इनमें से 84 सरकारी जमीन पर हैं और 12 निजी जमीन पर, जो 'नो-कंस्ट्रक्शन जोन' के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

Ad

FTL के 33 मीटर में बड़ा खतरा
जलाशयों के फुल टैंक लेवल (FTL) से 33 मीटर के दायरे को सबसे संवेदनशील माना जाता है। केरवा जलाशय के इस दायरे में 16 पक्के निर्माण पाए गए हैं। इनमें से 2 सरकारी जमीन पर हैं, जिन्हें हटाने के आदेश राजस्व कोर्ट ने दे दिए हैं। बाकी 14 निजी जमीन पर हैं, जिन पर अब राजस्व विभाग नियमों के तहत कार्रवाई करने की तैयारी में है।

मंत्रालय में हुई बैठक में साफ कर दिया गया है कि भोपाल विकास योजना 2005 के क्लॉज 2.57 का कड़ाई से पालन होगा। 150 हेक्टेयर की यह जमीन केवल प्रकृति के लिए सुरक्षित रहेगी, यहां किसी भी निजी स्वार्थ के लिए कोई जगह नहीं है।

अब बनेगा बॉटनिकल गार्डन
सरकार की योजना यहां 150 हेक्टेयर क्षेत्र में एक विशाल बॉटनिकल गार्डन और रीजनल पार्क बनाने की है। इसके लिए टीएंडसीपी विभाग ने मैप तैयार कर लिया है। खसरा रिकॉर्ड को मास्टर प्लान के मैप पर सुपरइम्पोज कर दिया गया है, जिससे अब एक-एक इंच जमीन का हिसाब साफ हो गया है। कलेक्टर भोपाल को निर्देश दिए गए हैं कि वे राजस्व विभाग के जरिए इस पूरी जमीन को जल्द से जल्द बाउंड्री बनाकर सुरक्षित करें।

अब तक क्या हुआ?
13 फरवरी 2026 को मंत्रालय में निर्णायक बैठक हुई। इसके बाद 28 फरवरी 2026 को 69 में से 28 अवैध निर्माणों को प्रशासन ने जमींदोज कर दिया। जबकि बाकी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेदखली वारंट जारी हो चुके हैं।

क्यों जरूरी है यह कार्रवाई?
केरवा और कलियासोत न केवल भोपाल के जल स्तर को बनाए रखते हैं, बल्कि यह क्षेत्र बाघों और अन्य वन्यजीवों का कॉरिडोर भी है। पिछले कुछ वर्षों में यहां होटल, रेस्टोरेंट और फार्म हाउस की बाढ़ आ गई थी, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने लगा था। एनजीटी में दायर एक याचिका के बाद अब यह पूरा मामला कोर्ट की सीधी निगरानी में है।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here