भोपाल
कृष्ण पाथेय न्यास, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशभर के 29 ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व के स्थलों पर ‘कृष्ण पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित आयोजन आस्था और कला का अद्भुत संगम बनेगा। भगवान कृष्ण के जीवन -दर्शन, उन की लीलाओं, लोकमंगल की भावना एवं भारतीय संस्कृति में रचे-बसे उनके विविध स्वरूपों को प्रदेश एवं देश के ख्यातिलब्ध कलाकारअपनी सशक्त और मनोहारी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत करेंगे।
संगीत, नृत्य, नाट्य एवं अन्य पारंपरिक कला रूपों के माध्यम से इन स्थलों की ऐतिहासिकता, पौराणिकता और सांस्कृतिक विशिष्टता को रेखांकित किया जाएगा। यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि कृष्ण के जीवन-संदेश, सांस्कृतिक चेतना और भारत की समृद्ध कला परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का एक अभिनव प्रयास होगा, जिसमें हर स्थल अपनी विशिष्ट पहचान के साथ कृष्णमय वातावरण में रंगा नजर आएगा।
संचालक, संस्कृति एन.पी. नामदेव ने बताया कि कृष्ण पर्व के लिए चयनित 29 स्थलों में अनेक ऐसे पावन और ऐतिहासिक स्थल सम्मिलित हैं, जिनकी परंपराएं सीधे तौर पर द्वापर युग और भगवान कृष्ण के जीवन-प्रसंगों से जुड़ी हुई हैं। इनमें सांदीपनी आश्रम – उज्जैन, नारायणा धाम – उज्जैन, अमझेरा, जानापाव – महू एवं जामगढ़ – रायसेन जैसे स्थल प्रमुख हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थलों में अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक केंद्र भी शामिल हैं, जिनका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व होने के साथ-साथ गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत भी है।
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की धरती भगवान कृष्ण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को अपने भीतर समेटे हुए है। भगवान कृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं एवं लीलाओं के लोकव्यापीकरण, सनातन संस्कृति के विस्तार के साथ ही उनके द्वारा बताए जीवन मूल्यों यथा धैर्य, मित्रता, करुणा, दया इत्यादि जनमानस तक प्रेषित करने के उद्देश्य से माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप कृष्ण पर्व के माध्यम से सांस्कृतिक परिदृश्य में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है।
इन आयोजनों के माध्यम से न केवल इन स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को व्यापक पहचान मिल रही है, बल्कि नई पीढ़ी भी मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत और गौरवपूर्ण इतिहास से परिचित हो रही है। यह पहल आस्था के उत्सव के साथ-साथ विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्स्मरण और प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। इस वर्ष कृष्ण पर्व के आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होने वाली स्थानीय गतिविधियों को विस्तार करने के लिए सांस्कृतिक महत्व के स्थलों को चिन्हित कर वहां आयोजन किए जा रहे हैं।
भगवान कृष्ण से जुड़े मध्यप्रदेश के स्थल
सांदीपनि आश्रम, उज्जैन
उज्जैन का नाम आते ही बाबा महाकाल का नाम ध्यान में आ जाता है, लेकिन यही वह भूमि भी है जहां भगवान कृष्ण ने अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय लिखा। मान्यता है कि भगवान कृष्ण सांदीपनि आश्रम में 64 दिवस तक रहे। इस अवधि में उन्होंने 64 विद्याओं और 16 कलाओं का ज्ञान प्राप्त किया। परंपराओं के अनुसार उन्होंने चार दिनों में चार वेद, 18 दिनों में 18 पुराण ओर छह दिनों में छह शास्त्रों का अध्ययन किया। मान्यता है कि इसी आश्रम में भगवान शिव और भगवान कृष्ण का दिव्य मिलन हुआ था। भारतीय संस्कृति में इसे हरि और हर के पावन मिलन के रूप में देखा जाता है। उज्जैन वह स्थान है, जहां ज्ञान ने व्यक्तित्व को आकार दिया, जहां गुरु ने शिष्य को दिशा दी, जहां मित्रता ने आदर्श स्थापित किया और जहां से योगेश्वर कृष्ण की यात्रा ने नई ऊंचाईयों की ओर कदम बढ़ाया। सांदीपनि आश्रम के आसपास ‘सांदीपनि लोक’ विकसित करने की योजना को भगवान कृष्ण से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देने वाली परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें भगवान कृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा, लगभग 9 थीम आधारित जोन तथा आधुनिक डिजिटल/AR-VR अनुभव जैसी अवधारणाएँ शामिल हैं। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को केवल दर्शन तक सीमित न रखते हुए कृष्ण के जीवन, शिक्षा, गुरुकुल परंपरा और भारतीय ज्ञान-विरासत का अनुभवात्मक परिचय देना है। प्रदेश में भगवान कृष्ण से जुड़े स्थलों को एक व्यापक सांस्कृतिक-तीर्थ पर्यटन श्रृंखला से जोड़ने के लिए ‘कृष्ण पाथ’ विकसित किया जा रहा है। यह पहल मध्यप्रदेश की ‘विरासत से विकास’ की व्यापक सोच के अनुरूप है। सांदीपनि आश्रम पहले से ही उज्जैन के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।
नारायणा धाम, उज्जैन
नारायणा धाम मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के ग्राम नारायणा में स्थित भगवान कृष्ण और सुदामा की मैत्री से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह स्थल उज्जैन की उस व्यापक कृष्ण-परंपरा का हिस्सा है, जिसमें सांदीपनि आश्रम को कृष्ण की विद्यास्थली और नारायणा धाम को कृष्ण-सुदामा की मैत्री एवं प्रवास की स्मृति से जुड़े स्थल के रूप में देखा जाता है। नारायणा धाम से जुड़ी लोक-परंपरा और धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण और सुदामा ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करते समय यहां रात्रि विश्राम किया था। कथा के अनुसार, गुरु माता के निर्देश पर कृष्ण और सुदामा वन से लकड़ियां लेने गए थे। अचानक वर्षा होने के कारण वे वापस आश्रम नहीं लौट सके और एक वृक्ष के नीचे रात्रि बिताई। इसी प्रसंग को नारायणा धाम की धार्मिक पहचान से जोड़ा जाता है। स्थानीय परंपरा में यहां स्थित वृक्षों को भी इसी प्रसंग की स्मृति से जोड़ा जाता है। नारायणा धाम की विशिष्टता यह है कि यहां भगवान कृष्ण के साथ उनके बालसखा सुदामा की आराधना की जाती है। इस कारण यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में मित्रता, समानता, स्नेह और मानवीय संबंधों के आदर्श का प्रतीक भी बन गया है। वहां स्थित गोमती कुंड, अंकपात क्षेत्र और अन्य स्मृति-स्थल कृष्ण की शिक्षा-परंपरा से जुड़े हैं। नारायणा धाम के विकास को अब केवल स्थानीय मंदिर विकास तक सीमित न रखकर कृष्ण पाथेय की व्यापक अवधारणा से जोड़ा जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने भगवान कृष्ण से संबंधित स्थलों को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए “कृष्ण पाथेय न्यास” का गठन किया गया है। भगवान कृष्ण से संबंधित क्षेत्रों का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संरक्षण-संवर्धन, मंदिरों एवं संरचनाओं का प्रबंधन, सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना के लिए परामर्श तथा कृष्ण पाथेय के स्थलों का सामाजिक, आर्थिक और पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जा रहा है।
अमझेरा, धार
मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित अमझेरा में इतिहास, आस्था और पौराणिक स्मृतियों की अनगिनत परतें समाई हुई हैं। लोक परंपराओं के अनुसार यही वह स्थान है, जहां भगवान कृष्ण और रुक्मिणी की दिव्य कथा का निर्णायक मोड़ आया था। अमझेरा का सबसे प्रमुख धार्मिक केंद्र मां अमका-झमका माता का प्राचीन मंदिर है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यही वह स्थल है, जहां विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में प्रार्थना की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार विदर्भ देश की राजकुमारी रुक्मिणी अत्यंत गुणवान, धर्मपरायण और तेजस्विनी थीं। उन्होंने भगवान कृष्ण के गुण, पराक्रम और लोककल्याणकारी व्यक्तित्व के बारे में सुना था। उनके मन में कृष्ण के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण का भाव उत्पन्न हो चुका था। वे उन्हें अपना पति मान चुकी थीं। किन्तु परिस्थितियां अनुकूल नहीं थी। रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने उनका विवाह चेदि नरेश शिशुपाल के साथ निश्चित कर दिया था। यह निर्णय रुक्मिणी की इच्छा के विपरीत था। जब रुक्मिणी के भाई रुक्मी को इस घटना का समाचार मिला, तब वह क्रोधित हो उठा। उसने अपनी सेना के साथ कृष्ण का पीछा किया। अमझेरा से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित भोपावर क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच भीषण युद्ध हुआ। युद्ध में भगवान कृष्ण ने रुक्मी को पराजित कर दिया। मध्यप्रदेश सरकार ने अमझेरा को कृष्ण से जुड़े प्रमुख तीर्थ-स्थलों में शामिल करते हुए इसे विकसित करने की विशेष पहल की गई है। अमझेरा को तीर्थ नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह विकास व्यापक “कृष्ण पाथेय” की अवधारणा के अंतर्गत किया जा रहा है।
जामगढ़ – रायसेन
रायसेन जिले की बरेली तहसील के ग्राम जामगढ़ के निकट विंध्याचल क्षेत्र में स्थित जामवंत गुफा भगवान कृष्ण, जामवंत और स्यमंतक मणि से जुड़े पौराणिक प्रसंग के कारण विशेष महत्व रखती है। स्यमंतक मणि के प्रसंग में भगवान कृष्ण और जामवंत के बीच इसी गुफा में 27 दिनों तक युद्ध हुआ था। युद्ध के दौरान जामवंत को यह अनुभूति हुई कि कृष्ण ही उनके आराध्य भगवान राम हैं; इसके बाद उन्होंने स्यमंतक मणि कृष्ण को सौंपकर अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह उनसे किया। जामगढ़ क्षेत्र का महत्व केवल कृष्ण-परंपरा तक सीमित नहीं है। यहां प्राचीन शिव उपासना से जुड़े स्थल, गुफाएं तथा अन्य पुरातात्विक अवशेष भी पाए जाते हैं और हाल के क्षेत्रीय सर्वेक्षणों में जामगढ़ के जंगलों में लगभग 800 मीटर लंबी पत्थरों पर पदचिह्नों वाली एक प्राचीन पगडंडी तथा प्रारंभिक नागरी लिपि का शिलालेख मिलने की जानकारी मिली है। मध्यप्रदेश सरकार ने जामगढ़ को भगवान कृष्ण से जुड़े स्थलों की व्यापक विकास अवधारणा ‘कृष्ण पाथेय’ में शामिल करने की दिशा में पहल की है। जामगढ़ के संबंध में इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष स्थल का शोधपरक परीक्षण और दस्तावेजीकरण है।
जुगल किशोर एवं बलदेव जी मंदिर, पन्ना
पन्ना को प्राचीन मंदिरों और धार्मिक परंपराओं के कारण “मंदिरों की नगरी” के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित जुगल किशोर जी मंदिर और बलदेव जी मंदिर पन्ना की धार्मिक एवं स्थापत्य विरासत के दो प्रमुख केंद्र हैं। जुगल किशोर जी मंदिर का निर्माण पन्ना के चौथे बुंदेला शासक राजा हिंदूपत सिंह ने अपने शासनकाल (1758–1778) में कराया था। मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित भगवान जुगल किशोर जी की प्रतिमा के संबंध में स्थानीय परंपरा है कि इसे वृंदावन से ओरछा के मार्ग से पन्ना लाया गया था। मंदिर की स्थापत्य शैली में बुंदेला वास्तुकला की विशिष्ट विशेषताएं – नट मंडप, भोग मंडप और प्रदक्षिणा पथ – स्पष्ट दिखाई देती हैं तथा भगवान के आभूषण एवं वस्त्रों में बुंदेलखंडी परंपरा की झलक मिलती है। बलदेव जी मंदिर पन्ना की धार्मिक विरासत के साथ-साथ अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के कारण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर रोमन वास्तुकला से प्रेरित तथा गॉथिक प्रभाव वाला है। विशाल स्तंभों से युक्त इसका महा-मंडप ऊंचे चबूतरे पर निर्मित है, जिससे मुख्य द्वार के बाहर से भी श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकते हैं। यहां भगवान बलदेव जी की आकर्षक प्रतिमा काले शालिग्रामी पत्थर से निर्मित है और यह मंदिर पन्ना की स्थापत्य कला की विशिष्ट उपलब्धियों में गिना जाता है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा पन्ना के इन धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से महत्व दिया गया है।
नारायणा धाम, उज्जैन में पांच दिवसीय आयोजन
नारायणा धाम मंदिर प्रांगण, नारायणा (उज्जैन) में 02 से 06 सितम्बर तक पांच दिवसीय आयोजन होगा। यहां प्रथम दिवस गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़े उस प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें भगवान कृष्ण और सुदामा जंगल में लकड़ियां चुनने गए थे एवं सुदामा द्वारा गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने की कथा को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इस अवसर पर सु गौरी प्रिया, ग्वालियर द्वारा भरतनाट्यम एवं सु माधवी मधुकर झा, वृंदावन द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। द्वितीय दिवस सु प्रशस्ति मानेसर, मुंबई द्वारा कथक में ‘कृष्णम’ नाटिका एवं नितिन अग्रवाल, दमोह द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। तृतीय दिवस रोजलिन सुंदराय, भुवनेश्वर द्वारा ओडिसी शैली में कृष्ण पर आधारित नृत्यनाटिका और सु वाणी राव, भोपाल द्वारा भजन गायन होगा। चतुर्थ दिवस मुकेश दरबार, बुरहानपुर द्वारा कृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग एवं सु आस्था गोस्वामी, लखनऊ द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। पंचम दिवस सु अभिलाषा तिवारी, भोपाल द्वारा गीता उपदेश पर केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं विवेक अग्रवाल, इंदौर द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। आयोजन के सभी पांचों दिवस गिरधर गोपाल शर्मा, वृंदावन द्वारा रासलीला का मंचन भी किया जाएगा।
सांदीपनि आश्रम, उज्जैन में गुरु-शिष्य परंपरा पर केंद्रित प्रस्तुतियां
सांदीपनि आश्रम, उज्जैन में 02 से 04 सितम्बर तक तीन दिवसीय आयोजन होगा। प्रथम दिवस डॉ. लता मुंशी, भोपाल द्वारा ‘कर्षति इति कृष्ण’ एवं चरणजीत सिंह सौंधी, मुंबई द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। द्वितीय दिवस अनुराग त्रिपाठी, भोपाल द्वारा बघेली लोकगायन एवं अखिलेश तिवारी, भोपाल द्वारा भजन गायन होगा। तृतीय दिवस भगवान कृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने, 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञान अर्जित करने की पौराणिक परंपरा पर आधारित नृत्य-नाटिका सु गीता पिल्लई, इंदौर द्वारा प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही सु इशिता विश्वकर्मा, मुंबई द्वारा भजन गायन होगा।
महिदपुर, उज्जैन में कृष्ण प्रेम और लोकसंगीत की छटा
रामलीला चौक, महिदपुर (उज्जैन) में 02 से 04 सितम्बर तक तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। प्रथम दिवस सु कल्याणी-वैदेही फगरे द्वारा राधा-कृष्ण प्रेम प्रसंग पर आधारित प्रस्तुति तथा ओमप्रकाश वास्तव, मुंबई द्वारा भजन गायन होगा। द्वितीय दिवस गयाप्रसाद प्रजापति, रायसेन द्वारा बुंदेली गायन और दविंदर सिंह ग्रोवर द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। तृतीय दिवस बृजेन्द्र ब्रज, इंदौर द्वारा भजन गायन के साथ महिदपुर की कृष्ण पाथेय से जुड़ी परंपरा को केंद्र में रखकर सु नूपुर माहौर, भोपाल द्वारा कृष्ण जन्म पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।
पन्ना और अमझेरा में कृष्ण के विविध प्रसंग होंगे साकार
बलदेवजी मंदिर परिसर, पन्ना में 02 सितम्बर को सु मिली वर्मा, भोपाल द्वारा बलदेव-कृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका एवं विकास सिरमोलिया, भोपाल द्वारा भजन गायन होगा। जुगल किशोर मंदिर प्रांगण, पन्ना में 03 एवं 04 सितम्बर को दो दिवसीय आयोजन में सु दामिनी पठारिया, नर्मदापुरम द्वारा भजन गायन एवं कृष्ण भक्ति की प्रणामी परंपरा पर केंद्रित नृत्य-नाटिका सु जान्हवी सिंह, रीवा द्वारा भरतनाट्यम शैली में प्रस्तुत की जाएगी। द्वितीय दिवस सु अंकिता कैलासिया, ग्वालियर द्वारा भक्ति गायन एवं रंग त्रिवेणी सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा कृष्ण नृत्य-नाटिका का मंचन होगा।
अमझेरा में रुक्मिणी हरण पर नृत्य-नाटिका
थाना परिसर के पीछे, अमझेरा (धार) में 03 एवं 04 सितम्बर को हरीश शर्मा, भोपाल द्वारा कृष्ण लीला पर आधारित नृत्य-नाटिका एवं शर्मा बंधु, उज्जैन द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। द्वितीय दिवस सु आकृति सोनी, इंदौर द्वारा भजन गायन और अमझेरा से जुड़े रुक्मिणी हरण एवं विवाह प्रसंग पर सु दुर्गा मिश्रा, भोपाल द्वारा नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।
एक दिवसीय आयोजनों में प्रदेशभर में गूंजेगी कृष्ण भक्ति
माँ बिरासनी क्रिकेट स्टेडियम, पाली (उमरिया) में 04 सितम्बर को सु शर्मिष्ठा रानी पांडा, भुवनेश्वर द्वारा मथुरा प्रवेश प्रसंग पर आधारित प्रस्तुति तथा दीन भगत और अखिलेश राजा, जबलपुर द्वारा भजन गायन होगा। मानस भवन सभागार, शहडोल में सु मणिमाला सिंह – रीवा द्वारा बघेली गायन, सु शांभवी शुक्ला – सागर द्वारा कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर नृत्य-नाटिका एवं प्रभंजय चतुर्वेदी, दुर्ग द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। महिष्मती घाट, मंडला में नेहा विश्वकर्मा, जबलपुर द्वारा गोवर्धन धारण तथा मोहिनी मोघे, जबलपुर द्वारा सुदामा मिलन प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी। रूद्रकांत ठाकुर, सिवनी द्वारा भजन गायन होगा।
जानापाव में परशुराम-कृष्ण प्रसंग और अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शनी
परशुराम जन्मस्थली, जानापाव (महू) में भगवान परशुराम एवं भगवान कृष्ण के प्रसंग पर आधारित विशेष प्रस्तुति होगी। जानापाव की पावन भूमि पर भगवान कृष्ण में भगवान परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया। इसी प्रसंग पर केंद्रित नृत्यनाटिका की प्रस्तुति यहां होगी, जिसे सु पूर्वी नगाइच, नर्मदापुरम द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। अभिषेक गावड़े एवं समूह, इंदौर द्वारा भजन गायन एवं वीर भारत न्यास द्वारा अस्त्र-शस्त्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
लोकगायन, भजन और नृत्य-नाटिकाओं का होगा अद्भुत संगम
कृष्ण पर्व के अंतर्गत मानस भवन सभागार, दमोह में 04 सितम्बर को पवन तिवारी – टीकमगढ़ द्वारा भजन गायन, सु अनामिका पांडेय – छतरपुर द्वारा बुंदेली गायन एवं सु बिथिका मिष्ठी, भोपाल द्वारा कालियानाग वध पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम, रीवा में सु कल्याणी मिश्रा द्वारा बघेली लोकगायन, सु वैशाली रायकवार, भोपाल द्वारा भजन गायन एवं सु आस्था सिजारिया, कटनी द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका होगी। राधा-कृष्ण मंदिर, खातेगांव (देवास) में सु मुस्कान चौरसिया, बालाघाट द्वारा भजन गायन एवं सु शालिनी खरे, जबलपुर द्वारा जामवंत एवं कृष्ण प्रसंग पर आधारित प्रस्तुति दी जाएगी। गोपाल मंदिर, उज्जैन में द्वारकाधीश्वर स्वरूप में प्रतिष्ठित भगवान कृष्ण की लोकआस्था से जुड़े इस प्रमुख मंदिर में गीत गोविंद पर केंद्रित नृत्य-नाटिका तेजस फाउंडेशन, मुंबई द्वारा तथा सु आकृति मेहरा, भोपाल द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा।
अन्य स्थलों पर भी सजेगा कृष्णमय सांस्कृतिक उत्सव
कृष्ण पर्व के अंतर्गत 04 सितम्ब्र, 2026 को रणछोड़ मंदिर, आगर-मालवा में सुंदरलाल मालवीय, उज्जैन द्वारा भक्ति गायन एवं सु कशिश सितलानी, उज्जैन द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका होगी। जामगढ़, जिला रायसेन में शिरीष राजपुरोहित, उज्जैन द्वारा कृष्ण केंद्रित महानाट्य एवं मोहित शेवानी एवं दल, भोपाल द्वारा स्टोरी टेलिंग ‘कृष्णायन’ की प्रस्तुति होगी। वहीं, राधेश्यामजी मंदिर, राघौगढ़, जिला गुना में सु हीना वासन एवं साथी, उज्जैन द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं नितिन अखंड, उज्जैन द्वारा भजन गायन होगा। कृष्ण मंदिर, तराना, उज्जैन में सु शीला त्रिपाठी द्वारा लोकगायन एवं करण सिंह गुर्जर द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। राधाकृष्ण मंदिर, भितरवार, जिला ग्वालियर में ईशान मिनोचा, जबलपुर द्वारा भजन गायन एवं सु दीपिका पुरोहित, भोपाल द्वारा गायन प्रस्तुत किया जाएगा। राधा-माधव मंदिर, बिजावर, जिला छतरपुर में मनीष कुमार चौधरी, कटनी द्वारा भजन गायन एवं अनुष्काम जोशी, देवास द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका होगी। राधा-कृष्ण मंदिर, बदरवास, जिला शिवपुरी में सु दीक्षा अस्थाना, भोपाल द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं मनीष अग्रवाल, जबलपुर द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। नाथद्वारा जी मंदिर, झाबुआ में सु गीता शर्मा, इंदौर द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं सु संजो बघेल, जबलपुर द्वारा भजन गायन होगा। नाथद्वारजी मंदिर, जावद, जिला नीमच में सु पूर्णिमा चतुर्वेदी, भोपाल द्वारा लोकगायन तथा सु पल्लवी तिवारी, सिवनी द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी। द्वारकाधीश मंदिर, मनासा, जिला नीमच में सु प्रतिमा गोस्वामी, भोपाल द्वारा भजन गायन एवं सु दीपिका सिंह, इंदौर द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। राधाकृष्ण मंदिर, मल्हारगढ़, जिला मंदसौर में सु सन्नाली शर्मा एवं समूह द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं दीपक कुमार राव द्वारा भजन गायन होगा। चक्रधारी मंदिर, अम्बाह, जिला मुरैना में सु संघमित्रा तायवाड़े, भोपाल द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं सु साधना जेजुरीकर, उज्जैन द्वारा भजन गायन प्रस्तुत किया जाएगा। कल्याणरायजी की हवेली, खिलचीपुर, जिला राजगढ़ में सु अदिति तिवारी, उज्जैन द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं राहुल गंधर्व, उज्जैन द्वारा भजन गायन होगा। वहीं, गोपाल-कृष्ण जी मंदिर, देपालपुर, जिला इंदौर में कपिल शर्मा एवं समूह, भोपाल द्वारा कृष्ण केंद्रित नृत्य-नाटिका एवं डॉ. वाणी साठे जोशी, उज्जैन द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति होगी।









