हर ऑफिस में दो तरह के लोग होते हैं एक वो जो दिल से काम करते हैं, और दूसरे वो जो ऐसे लोगों का फायदा उठाते हैं. पहले वाले लोग मेहनती, ईमानदार और अपने काम को पूजा मानने वाले होते हैं. लेकिन दूसरे लोग चालाक होते हैं. वे लोगों को पढ़ना जानते हैं, सही टाइमिंग समझते हैं और अपनी मुस्कान के पीछे पूरा प्लान छुपाकर रखते हैं. सच्चाई ये है कि आज की दुनिया में जीत अक्सर उसी की होती है जो सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि खेल को समझता है. क्या कभी आपको लगा है कि आप दिल से काम करते हैं, लेकिन क्रेडिट किसी और को मिल जाता है? क्या आपने महसूस किया है कि आपकी ईमानदारी को ही लोगों ने आपकी कमजोरी समझ लिया? तो चलिए चाणक्य की उन नीतियों के बारे में जानते हैं जिससे ऑफिस में लोग आपकी इज्जत करेंगे.
अपनी भावनाओं पर कंट्रोल रखें
चाणक्य नीति के मुताबिक, लोग आपको उकसाएंगे, आपकी प्रतिक्रिया देखेंगे और उसी का इस्तेमाल आपके खिलाफ करेंगे. लेकिन याद रखें कि हर जवाब तुरंत देना जरूरी नहीं. कई बार मौन सबसे बड़ा जवाब होता है.
ब्लाइंड ट्रस्ट मत करो
भरोसा करो, लेकिन जांचकर. क्योंकि अंधविश्वास हमेशा नुकसान देता है. इसलिए देख परख कर लोगों की संगत में जाओ.
अपनी कमजोरी किसी को मत बताओ
चाणक्य नीति के मुताबिक, ऑफिस में आपकी भावनाएं आपकी ताकत नहीं, आपकी कमजोरी बन सकती हैं.
हर चीज का रिकॉर्ड रखें
काम, मेल और निर्देश, सब कुछ अपने पास लिखित में रखें. क्योंकि ऑफिस में सिंपैथी नहीं, एविडेंस काम आता है.
अपनी इमेज पर काम करें
आपका काम बाद में देखा जाता है, आपकी छवि पहले. इसलिए, ऑफिस में कोई भी गलत काम मत कीजिए.
ऑब्जर्व करना सीखो
कौन किसके साथ है, कौन किसकी तारीफ करता है, कौन किससे चुप हो जाता है. ये सब बहुत कुछ बताता है.
क्या कहती है चाणक्य नीति?
ऑफिस की राजनीति आपको गिराने के लिए नहीं, आपको मजबूत बनाने के लिए आती है. अगर आप संयम, रणनीति और ईमानदारी के साथ डटे रहे, तो एक दिन वही लोग आपके सामने खड़े होंगे जो आज आपको नजरअंदाज कर रहे हैं. सीधे रहो, पर मूर्ख नहीं. सच्चे रहो, पर सजग रहो. और जब सब चाल चलें, तो आप अपनी नीति से जीतिए.









