Home विदेश ईरान-ओमान का होर्मुज पर बड़ा समझौता, जहाजों की आवाजाही संभालेंगे दोनों देश

ईरान-ओमान का होर्मुज पर बड़ा समझौता, जहाजों की आवाजाही संभालेंगे दोनों देश

2
0
Jeevan Ayurveda

नई दिल्ली
अमेरिका और इजरायल द्वारा मिलकर ईरान पर हमला किए जाने के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति तेजी के साथ बदली है। कभी सभी के लिए खुला रहने वाला होर्मुज स्ट्रेट आज केवल कुछ ही देशों के लिए चालू है। अब इस मामले पर एक अहम परिवर्तन हुआ है। होर्मुज के दोनों किनारों पर स्थित ईरान और ओमान ने इस समुद्री रास्ते को लेकर एक नया समझौता किया है। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन ईरानी मीडिया के मुताबिक इस समझौते के तहत कुछ हद तक जानकारियां सामने आई हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों खाड़ी देशों के बीच हुए इस समझौते होर्मुज से निकलने वाले जहाजों की स्थिति के बारे में तय किया गया है। इसमें होर्मुज में बाहर से आने वाले कमर्शियल जहाजों को ईरान संभालेगा। वही, इनको नियंत्रित करेगा। दूसरी तरफ, ओमान होर्मुज से बाहर की तरफ जाने वाले जहाजों की देख रेख करेगा और उनकी नेविगेशन को संभालेगा।

Ad

होर्मुज पर फीस लेंगे ओमान और ईरान?
क्या अब यहां पर यह दोनों देश किसी तरह की फीस भी लेंगे? इसको लेकर खुले तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि, ईरान, अमेरिका के साथ जारी युद्ध के बाद लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि वह होर्मुज पर फीस लगाने वाला है। वह इसे फीस नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए दिया जाने वाला 'सर्विस टैक्स' करार देता है।

शिपिंग लाइन बनाएंगे ओमान और ईरान
आने-जाने वाले जहाजों को और अधिक सुविधा देने और टक्कर से बचाने के लिए ईरान और ओमान इस रास्ते पर शिपिंग लाइन का निर्माण करेंगे। इसका उद्देश्य जहाजों के बीच की टक्कर को रोकना होगा। दोनों देशों की तरफ से बताया गया कि इस समझौते का मुख्य लक्ष्य महीनों से उलझे होर्मुज स्ट्रेट के विवाद को शांत करना और ग्लोबल ऊर्जा सप्लाई चैन को दोबारा से शुरू करना है। इस मामले पर अभी दोनों देश काम कर रहे हैं। तकनीकी चीजें साफ होने के बाद इस पर एक आधिकारिक दस्तावेज जारी किया जाएगा

अमेरिका पर निगाहें
ओमान और ईरान किसी भी समझौते पर पहुंच जाएं। लेकिन फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट काम करेगा या नहीं यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका क्या ऐक्शन लेता है। वर्तमान में अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के बाहर नाकेबंदी करके बैठा हुआ है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति का एक बयान सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि वह जल्दी ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी संपत्ति घोषित करने वाले हैं। इससे क्षेत्र में और भी ज्यादा तनाव बढ़ गया है।

दरअसल, अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर युद्ध पूर्व की स्थिति बरकरार रहे और किसी भी देश के ऊपर कोई टैक्स न लगाया जाए। लेकिन अपने दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना कर चुका ईरान अब पीछे हटने को तैयार नहीं है। क्योंकि तेहरान को इस समय लग रहा है कि वह जो भी शर्तें मनवाना चाहें, मनवा सकता है। दोनों तरफ से युद्ध में जीत के दावे की वजह से होर्मुज की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई है।

दुनिया के लिए क्यों जरूरी है होर्मुज स्ट्रेट
पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज स्ट्रेट शुरुआत से ही चर्चा का विषय रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि यह समुद्री रास्ता वैश्विक अनवीकरणीय ऊर्जा का करीब 20 फीसदी हिस्से की सप्लाई के लिए जिम्मेदार माना जाता है। खाड़ी देश इसी रास्ते से दुनिया भर को तेल और गैस की सप्लाई करते हैं। अब चूंकि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर हमला हो रहा है। ऐसी स्थिति में मामला बिगड़ गया है।

जहाजों का बीमा महंगा हो गया है और अब कंपनियां हमलों के डर से इस रास्ते पर जाने से भी कतरा रही हैं। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा के दाम बढ़ रहे हैं।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here