खैरागढ़
से प्रारंभ प्रेमचंद पखवाड़ा के चलते प्रगतिशील लेखक संघ खैरागढ़ और पाठक मैच खैरागढ़ के संयुक्त तत्वाधान में प्रेमचंद की कहानी "दुनिया का सबसे अनमोल रतन का वर्तमान संदर्भ'' पर विचार गोष्ठी आयोजन डॉ. जीवन यदु की उपस्थिति में किया गया।
विचार गोष्ठी के अध्यक्षीय संबोधन में संकल्प पहटिया ने कहा —यह कहानी सोजे वतन में संकलित है । इसी कहानी को आधार बनाकर अंग्रेज सरकार ने इस किताब प्रतिबंध लगाया और इसकी प्रतियाॅं जलायी। आज भी राष्ट्रवाद के चलते प्रतिबंध लगते रहते हैं । प्रेम की विराटता लिए हुए यह कहानी यमन के लोककथा पर आधारित तो है ही और भारतीय पृष्ठभूमि से जुड़कर वैश्विक ऊॅंचाई को छूती है । मुख्य पात्र व्यक्तिवादी प्रेम के मायाजाल को तोड़ता हुआ देश-दुनिया में अपने प्रेम को पाता है। उस समय के बहुत से साहित्यकारों ने अतीतजीवी रचनाएं लिखी । इसीलिए वे जयशंकर प्रसाद को लिखते हैं " आपको ईश्वर ने जो शक्ति दी है,उनका उपयोग वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं के हल करने में लगाइए। इन गड़े मुर्दों को उखाड़ने से आज कोई फ़ायदा नहीं।" आजादी मिलने के बाद काम खत्म नहीं हो जाता, उसे सम्हालना आज़ादी मिलने से बड़ा काम है।आज का हमारा समय राष्ट्र और देश के बीच पिस रहा है। इसीलिए लगातार आन्दोलन हो रहे हैं। अभी हमारे जेन जी आन्दोलन एक उदाहरण है।
पाठक मंच के संयोजक डॉ. प्रशांत ने कहा कि प्रेमचंद स्वाधीनता आंदोलन को अपने लेखन में समेटते हुए जनमानस को लगातार प्रेरित करते रहते हैं। यह कहनी उसका सबसे बड़ा प्रमाण है।विनयशरण सिंह ने कहा कि कुछ विद्वान इस कहानी को प्रेमचंद की पहली कहानी मानते हैं। देश के लिए बलिदान व्यक्तिगत प्रेम से बड़ा होता है। राष्ट्रीयता के दौर में इस कहानी की प्रासंगिकता और बढ़ी है। टीकाराम देशमुख ने कहा कि यह कहानी भारतीय स्वाधीनता की भावना के लिए प्रेरित करती कहानी है जब गाँधी जी का भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में आगमन नहीं हुआ था । कहानी का यह संवाद —' क्या मैं अपने देश में गुलामी करने के लिए जिन्दा रहूॅं ? नहीं,ऐसी जिंदगी से मर जाना अच्छा।' बहुत अपील करता है। टी.ए.खान ने कहा कि यह उनकी शुरुआती दौर की कहानी है। वे उर्दू लेखन से हिन्दी में आए थे। इसीलिए उर्दू शब्दों की बहुलता है। आज के संदर्भ में इस कहानी का इसलिए भी महत्व है कि आज हिन्दी को उर्दू के प्रतिद्वंद्वी या मुसलमान की भाषा के रूप में देखा जाता रहा है।
संचालन करते हुए रवि झोंका ने कहा कि आज से सौ-सवा सौ साल पहले लिखी गई देशप्रेम से ओतप्रोत कहानी वर्तमान में इसका और भी महत्व बढ़ गया है क्योंकि आज राष्ट्र के नाम पर तरह-तरह के नियम हैं जो हमें गुलामी का अहसास दिलाता है। इससे पहले डॉ. जीवन यदु ने सभी सदस्यों को स्वागत करते हुए शुभकामनाएँ । टीकाराम देशमुख और रवि झोंका ने प्रेमचंद की कहानी "दुनिया का सबसे अनमोल रतन" का वाचन किया।









