5,000 महिलाओं के हाथों से तैयार हो रहीं आधुनिक डिजाइनों की राखियां

    6
    0
    Jeevan Ayurveda

    लखनऊ
     इस रक्षाबंधन भाइयों की कलाइयों पर सिर्फ राखी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता का रंग भी नजर आएगा। प्रदेश में लगभग 5,000 महिलाएं आकर्षक, पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों की राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यमों से भी ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप अभियान चलाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

    मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उनके उत्पादों के लिए बेहतर और व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ई-सरस (eSARAS) सहित विभिन्न ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से समूहों के उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है।

    Ad

    वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मिर्जापुर, अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर, कानपुर, आगरा, बरेली, झांसी, फर्रुखाबाद और नोएडा सहित विभिन्न जिलों में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं राखी निर्माण में जुटी हैं। स्थानीय कला, पारंपरिक शिल्प और रचनात्मकता के साथ तैयार की जा रही इन राखियों में महिलाओं के हुनर की झलक दिखाई दे रही है।

    ऑनलाइन बाजार से जुड़ने के कारण इन महिलाओं के उत्पाद स्थानीय सीमाओं से बाहर निकलकर व्यापक स्तर पर उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे हैं। ई-सरस के साथ-साथ अन्य ई-कॉमर्स एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिक्री से महिलाओं को ग्राहकों तक पहुंचने, अपने उत्पादों की ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग बेहतर करने तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने का अवसर मिल रहा है।

    हुनर को आय और उद्यमिता के अवसर में बदलने का महत्वपूर्ण माध्यम
    मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए अपने हुनर को आय और उद्यमिता के अवसर में बदलने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। राखियों की बढ़ती ऑनलाइन मांग से यह स्पष्ट है कि ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार गुणवत्तापूर्ण उत्पादों में बड़े बाजार तक पहुंचने की पूरी क्षमता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस क्षमता को ग्राहकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    महिलाओं को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन तक में आगे बढ़ने का अवसर
    उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को ई-सरस, ई-कॉमर्स एवं अन्य डिजिटल बाजारों के साथ-साथ ऑफलाइन बाजारों से जोड़ने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया में आगे बढ़ने तथा अपने छोटे उद्यमों को विस्तार देने का अवसर मिल रहा है। इस रक्षाबंधन स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के हाथों से तैयार राखियां भाई-बहन के प्रेम के साथ ग्रामीण महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता की कहानी भी कहेंगी।

    Jeevan Ayurveda Clinic

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here