Home छत्तीसगढ़ CG विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका, SLP खारिज

CG विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका, SLP खारिज

3
0
Jeevan Ayurveda

भिलाई नगर.

भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 65 के निर्वाचन में विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है। निर्वाचन याचिका को नियमित ट्रायल तक पहुंचने से पहले कानूनी आपत्तियों के जरिए रोकने की उनकी एक और कोशिश सफल नहीं हो सकी।

Ad

सर्वोच्च न्यायालय ने देवेंद्र यादव द्वारा दायर एसएलपी (सिविल) नं. 28778 / 2026 को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अब 31 अगस्त से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनाव याचिका के ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 30 जून 2026 के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया और विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। मामला निर्वाचन याचिका क्रमांक 9/2024 से जुड़ा है, जिसमें वर्ष 2023 के भिलाई नगर विधानसभा चुनाव में देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी गई है। याचिका में नामांकन शपथ-पत्र में आवश्यक सांविधिक जानकारियों के समुचित प्रकटीकरण तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत निर्वाचन की वैधता से जुड़े गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि यह चुनाव उन्होंने भाजपा प्रत्याशी प्रेमप्रकाश पांडेय से करीब 1200 मतों के अंतर से जीता था।

अब ट्रायल से नहीं बच पाएंगे : एक के बाद एक प्रारंभिक कानूनी चुनौतियों के विफल होने के बाद अब निर्वाचन विवाद तकनीकी आपत्तियों से आगे बढ़कर साक्ष्यों और गवाहों की कसौटी पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद नियमित ट्रायल के आगे बढ़ने की कानूनी बाधा दूर हो गई है। 31 अगस्त से शुरू होने वाली कार्यवाही में हाईकोर्ट द्वारा 21 अगस्त 2024 को निर्धारित मुद्दों पर साक्ष्य पेश किए जाएंगे। गवाहों की परीक्षा और प्रतिपरीक्षा होगी तथा दोनों पक्षों को अपने दावों और बचाव के समर्थन में रिकॉर्ड न्यायालय के सामने रखना होगा। देवेंद्र यादव की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने पैरवी की, जबकि अधिवक्ता-ऑन रिकॉर्ड सुमीर सोढ़ी ने उनका प्रतिनिधित्व किया।

दो बार सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं :
लगातार दूसरी महत्वपूर्ण चुनौती में राहत नहीं मिलने के बाद अब देवेंद्र यादव के सामने निर्वाचन याचिका के नियमित ट्रायल का सामना करना होगा। अब मामला केवल प्रारंभिक कानूनी आपत्तियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चुनाव से जुड़े आरोपों, दस्तावेजों, साक्ष्यों और गवाहों की न्यायिक जांच होगी। सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्वयं देवेंद्र यादव का निर्वाचन निरस्त नहीं करता और निर्वाचन की वैधता पर अंतिम फैसला अभी हाईकोर्ट को करना है। लेकिन ट्रायल से पहले चुनाव याचिका को रोकने या समाप्त कराने की कोशिशों को लगातार झटका मिलने के बाद अब 31 अगस्त से अदालत में साक्ष्यों की निर्णायक लड़ाई शुरू होने जा रही है।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here