सपा सरकार की नीतियां थीं ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ : बृजलाल

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    सपा सरकार की नीतियां थीं ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ : बृजलाल
     
    राज्यसभा सांसद ने पूर्ववर्ती सरकार के फैसलों पर उठाए सवाल
     
    मुस्लिम बेटियों को अनुदान और कब्रिस्तानों की चहारदीवारी के फैसले का किया जिक्र
     
    आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश का लगाया आरोप
     
    मैनाठेर हिंसा, पीएसी की कंपनियों और खालिद मुजाहिद प्रकरण को लेकर भी सपा को घेरा
     
    लखनऊ

     पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार पर हमला बोलते हुए उसकी नीतियों को ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ करार दिया है। उन्होंने सपा सरकार के दौरान मुस्लिम बेटियों को अनुदान, कब्रिस्तानों की चहारदीवारी, आतंकवाद से जुड़े मुकदमे वापस लेने की कोशिश और पीएसी की कंपनियों को निष्क्रिय करने समेत कई फैसलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए।
     
    बृजलाल ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि सपा सरकार बनते ही केवल मुस्लिम बेटियों को 30 हजार रुपये का अनुदान देने की व्यवस्था की गई। उन्होंने सवाल किया कि पिछड़े, दलित और अन्य वर्गों की बेटियों के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बृजलाल ने इसे सपा सरकार की ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ बताया।
     
    उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार की प्राथमिकताओं में आतंकवाद से जुड़े मुकदमों को वापस लेना भी शामिल था। बृजलाल ने दावा किया कि 22 जनवरी, पांच मार्च, 15 अप्रैल और 18 अप्रैल 2013 को आतंकवाद से जुड़े 14 मुकदमे वापस लेने की कोशिश की गई। इसमें दो पाकिस्तानी नागरिकों और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण सरकार इसमें सफल नहीं हो सकी और बाद में आरोपियों को सजा हुई।
     
    कब्रिस्तानों की चहारदीवारी पर उठाए सवाल
    बृजलाल ने सपा सरकार के दौरान मुस्लिम कब्रिस्तानों की चहारदीवारी के लिए सरकारी धन दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य समुदायों के श्मशान और कब्रगाहों को ऐसी प्राथमिकता नहीं दी गई। दावा किया कि इस फैसले की आड़ में कई स्थानों पर ग्राम समाज और सरकारी जमीन पर कब्जे हुए।
     
    मैनाठेर हिंसा का किया जिक्र

    राज्यसभा सांसद ने छह जुलाई 2011 के मुरादाबाद के मैनाठेर प्रकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान थाना-चौकी और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया गया तथा तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह और उनके पीआरओ पर जानलेवा हमला हुआ। बृजलाल ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद सपा सरकार ने इस प्रकरण से जुड़े मुकदमे वापस लेने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने इस प्रयास को सफल नहीं होने दिया और बाद में 16 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई।
     
    पीएसी और एटीएस को लेकर भी साधा निशाना
    बृजलाल ने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने पीएसी की 46 कंपनियों को निष्क्रिय किया और एटीएस को भी कमजोर किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पीएसी में भर्ती करने के साथ तीन नई महिला पीएसी बटालियन बनाई हैं।
     
    खालिद मुजाहिद प्रकरण भी उठाया
    पूर्व डीजीपी ने खालिद मुजाहिद की मौत से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार में उनके और 38 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। बृजलाल ने इसे भी ‘ओपन कम्युनल कांस्पीरेसी’ बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद यह कार्रवाई समाप्त हुई।
     
    बृजलाल ने समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में नागरिकों को समान कानूनी अधिकार देने की व्यवस्था है। इससे लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश संविधान और उसके अंतर्गत बने कानूनों से चलता है।

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