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300 दिवस के प्रावधान के तहत बच्चों और माताओं को पूरक पोषण आहार उपलब्ध, अगस्त के प्रथम सप्ताह से नई टीएचआर व्यवस्था लागू

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भोपाल 

महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रदेश में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को वर्ष में औसतन 300 दिवस पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया गया है, जबकि 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं को औसतन 200 से 210 दिवस पूरक पोषण आहार प्रदान किया गया है। इस प्रकार प्रदेश के सभी पात्र हितग्राहियों को केवल 170 दिवस ही पोषण आहार मिलने की बात वास्तविक स्थिति नहीं है। प्रदेश में पूरक पोषण आहार की व्यवस्था को लेकर सामने आई खबरों के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने वस्तुस्थिति स्पष्ट की है।

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पूरक पोषण कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र हितग्राहियों को वर्ष में न्यूनतम 300 दिवस पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके तहत 3 से 6 वर्ष के बच्चों को वर्ष में 300 दिवस नाश्ता एवं गर्म पका भोजन उपलब्ध कराया जाता है। वहीं 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं को प्रत्येक मंगलवार को गर्म पका भोजन दिया जाता है, जो वर्ष में 52 दिवस होता है। शेष 248 दिवस के लिए टेक होम राशन (टीएचआर) उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

विभाग के अनुसार टीएचआर के लिए कच्ची सामग्री की आपूर्ति में व्यवधान के कारण इसके उत्पादन एवं वितरण पर प्रभाव पड़ा। कच्ची सामग्री प्रदायकर्ताओं द्वारा सामग्री उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण 248 निर्धारित दिवसों में से राज्य में औसतन 150 से 160 दिवस ही टीएचआर उपलब्ध कराया जा सका। इसके बावजूद 3 से 6 वर्ष के बच्चों को नाश्ता एवं गर्म पका भोजन सहित पूरक पोषण सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती रहीं। इसी कारण 170 दिवस के आधार पर पूरे प्रदेश में पोषण आहार उपलब्ध होने का निष्कर्ष वास्तविक स्थिति को पूरी तरह प्रदर्शित नहीं करता।

सात पोषण आहार संयंत्र बंद, लेकिन पोषण सेवाएं जारी

प्राप्त जानकारी अनुसार वर्तमान में एसआरएलएम द्वारा संचालित सभी सात पोषण आहार संयंत्र बंद हैं। हालांकि इसका प्रभाव पोषण सेवाओं को पूरी तरह बंद करने के रूप में नहीं पड़ा है। विभाग की नवीन टीएचआर नीति के तहत स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं को स्थानीय स्तर पर तैयार टीएचआर उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है।

प्रदेश के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में अगस्त 2026 के प्रथम सप्ताह से नई व्यवस्था के तहत टीएचआर का वितरण प्रारंभ किया जा चुका है और यह व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो रही है। आगामी नवीन व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया भी प्रचलन में है।

पोषण स्थिति की नियमित निगरानी

बच्चों की पोषण स्थिति की लगातार निगरानी के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन एवं लंबाई/ऊंचाई मापकर पोषण ट्रैकर पर दर्ज किया जा रहा है। चिन्हित कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण परामर्श, अतिरिक्त देखभाल तथा गंभीर स्थिति में स्वास्थ्य विभाग और पोषण पुनर्वास केंद्रों से समन्वय कर रेफरल की कार्रवाई की जाती है।

प्रत्येक माह 10 दिवसीय शारीरिक माप दिवसों के दौरान जन्म से 6 वर्ष तक के बच्चों की सघन स्क्रीनिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। चिकित्सकीय जटिलता पाए जाने पर आवश्यकता के अनुसार स्वास्थ्य जांच और उपचार के लिए रेफरल किया जाता है।

चिन्हित एसएएम, एमएएम एवं एसयूडब्ल्यू बच्चों का मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम में पंजीयन कर स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मैदानी अमले द्वारा गृहभेंट कर बच्चों का नियमित फॉलोअप किया जाता है तथा परिवारों को आवश्यक पोषण परामर्श दिया जाता है।

आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन गर्म भोजन

विभागीय जानकारी अनुसार 3 से 6 वर्ष के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन नाश्ता एवं गर्म पका भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं के लिए स्थानीय स्तर पर तैयार टीएचआर वितरण की व्यवस्था लागू की गई है।

इसके अतिरिक्त 6 से 60 माह के अति गंभीर कुपोषित (एसएएम) तथा 6 से 72 माह के अति कम वजन (एसयूडब्ल्यू) बच्चों को अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में स्थानीय स्तर पर तैयार टीएचआर उपलब्ध कराया जा रहा है।

विशेष जनजातीय क्षेत्रों में पोषण सेवाओं पर विशेष ध्यान

मध्यप्रदेश जनजातीय बहुल प्रदेश है। यहाँ सहरिया, बैगा एवं भारिया जैसे विशेष जनजातीय समूह भी निवास करते हैं। इन क्षेत्रों में पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के अंतर्गत 681 नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन प्रारंभ किया गया है।

विशेष जनजातीय क्षेत्रों में आंगनवाड़ी सेवाओं, पूरक पोषण आहार तथा बच्चों की वृद्धि एवं पोषण स्थिति की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग द्वारा इन क्षेत्रों में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर नियमित स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य जांच, रेफरल एवं फॉलोअप की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण सेवाओं को अधिक प्रभावी और स्थानीय स्तर पर सुदृढ़ बनाने के लिए नई टीएचआर व्यवस्था लागू की गई है। विभाग के अनुसार अगस्त के प्रथम सप्ताह से स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से टीएचआर वितरण प्रारंभ होने से हितग्राहियों तक पूरक पोषण आहार की उपलब्धता को निरंतर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

 

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